फरवरी, 2026: भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्तों में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि दोनों देश अगले 4-5 दिनों में एक ऐतिहासिक 'संयुक्त बयान' (Joint Statement) पर हस्ताक्षर करेंगे। यह द्विपक्षीय व्यापार समझौते (Bilateral Trade Agreement) की दिशा में पहला और सबसे बड़ा कदम है।
मुख्य आकर्षण: भारतीय निर्यातकों को मिलेगी बड़ी राहत
इस समझौते का सबसे बड़ा फायदा भारतीय व्यापारियों को होने वाला है।
मंत्री गोयल के अनुसार:
टैरिफ में भारी कटौती: वर्तमान में अमेरिका भारतीय सामानों पर जो 50% टैरिफ लगा रहा है, उसे घटाकर 18% कर दिया जाएगा।
कार्यकारी आदेश (Executive Order): यह कटौती अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा जारी एक एग्जीक्यूटिव ऑर्डर के जरिए तुरंत प्रभावी होगी।
मार्च के मध्य तक होगा कानूनी समझौता
हालांकि अमेरिकी टैरिफ जल्द ही कम हो जाएंगे, लेकिन भारत द्वारा अमेरिकी सामानों पर टैरिफ कम करने में थोड़ा समय लगेगा:
कानूनी प्रक्रिया: भारत के टैरिफ 'मोस्ट-फेवर्ड नेशन' (MFN) नियमों के तहत आते हैं, जिन्हें केवल कानूनी समझौते के बाद ही बदला जा सकता है।
डेडलाइन: भारत और अमेरिका के बीच औपचारिक और कानूनी समझौते पर मार्च 2026 के मध्य तक हस्ताक्षर होने की उम्मीद है।
$500 बिलियन का 'महा-प्लान': भारत क्या खरीदेगा?
भारत ने अगले 5 वर्षों में अमेरिका से 500 अरब डॉलर के सामान आयात करने का लक्ष्य रखा है। वाणिज्य मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की बढ़ती जरूरतों के लिए ये चीजें जरूरी हैं:
एविएशन (विमानन): अकेले बोइंग (Boeing) के विमानों और स्पेयर पार्ट्स का ऑर्डर $100 बिलियन के पार जा सकता है।
डेटा सेंटर्स: बजट 2026 में डेटा सेंटर्स को मिली छूट के बाद, भारत को भारी मात्रा में अमेरिकी आईसीटी (ICT) उपकरणों की जरूरत होगी।
ऊर्जा सुरक्षा: भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए अमेरिका से तेल और गैस का आयात बढ़ा सकता है।
कृषि और डेयरी क्षेत्र रहेंगे सुरक्षित
संसद में उठ रहे सवालों का जवाब देते हुए पीयूष गोयल ने यह साफ कर दिया है कि इस समझौते में भारत के कृषि और डेयरी क्षेत्रों के हितों की पूरी रक्षा की गई है। भारतीय किसानों को घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि संवेदनशील क्षेत्रों को सुरक्षा कवच दिया गया है।
यह व्यापार समझौता भारत को वैश्विक सप्लाई चेन का एक प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। अमेरिकी टैरिफ का 50% से घटकर 18% होना भारतीय टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग और अन्य निर्यात क्षेत्रों के लिए 'बूस्टर डोज' साबित होगा।

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